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अथर्ववेद

Kanda 20 • Sukta 107 • Mantra 3

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 20 • सूक्त 107 • मन्त्र 3

20.107.3

Mantra ID: 20.107.3

वि चि॑द्वृ॒त्रस्य॒ दोध॑तो॒ वज्रे॑ण श॒तप॑र्वणा । शिरो॑ बिभेद वृ॒ष्णिना॑ ॥ (३)

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अथर्ववेद मन्त्र 20.107.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

इंद्र ने क्रोध में भरे हुए वृत्र के शीश को अपने सौ धारों वाले एवं रक्त वर्षक वज के द्वारा काट दिया था. (३)

EN English Translation

Indra cut off the head of the vritra filled in anger with his hundred-edged and blood-bearing body. (3)

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