Popular:
अथर्ववेद

Kanda 20 • Sukta 107 • Mantra 4

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 20 • सूक्त 107 • मन्त्र 4

20.107.4

Mantra ID: 20.107.4

तदिदा॑स॒ भुव॑नेषु॒ ज्येष्ठं॒ यतो॑ ज॒ज्ञ उ॒ग्रस्त्वे॒षनृ॑म्णः । स॒द्यो ज॑ज्ञा॒नो नि रि॑णाति॒ शत्रू॒ननु॒ यदे॑नं॒ मद॑न्ति॒ विश्व॒ ऊमाः॑ ॥ (४)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

अथर्ववेद मन्त्र 20.107.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

ये इंद्र शक्तिशाली, धन संपन्न तथा सभी लोकों में श्रेष्ठ हैं. ये उत्पन्न होते ही शत्रु का वध करते हैं. इन के प्रकट होते ही इन की रक्षक शक्तियां शक्तिशालिनी बन जाती हैं. (४)

EN English Translation

This Indra is powerful, rich and superior among all worlds. They kill the enemy as soon as they are born. As soon as they appear, their protective powers become powerful. (4)

卐 HinduText AI