Popular:
अथर्ववेद

Kanda 20 • Sukta 108 • Mantra 2

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 20 • सूक्त 108 • मन्त्र 2

20.108.2

Mantra ID: 20.108.2

त्वं हि नः॑ पि॒ता व॑सो॒ त्वं मा॒ता श॑तक्रतो ब॒भूवि॑थ । अधा॑ ते सु॒म्नमी॑महे ॥ (२)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

अथर्ववेद मन्त्र 20.108.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! तुम हमारे पिता और माता हो. इसी कारण हम तुम से सुख की याचना करते हैं. (२)

EN English Translation

O Indra! You are our father and mother. That is why we beg you for happiness. (2)

卐 HinduText AI