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अथर्ववेद

Kanda 20 • Sukta 108 • Mantra 3

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 20 • सूक्त 108 • मन्त्र 3

20.108.3

Mantra ID: 20.108.3

त्वां शु॑ष्मिन्पुरुहूत वाज॒यन्त॒मुप॑ ब्रुवे शतक्रतो । स नो॑ रास्व सु॒वीर्य॑म् ॥ (३)

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अथर्ववेद मन्त्र 20.108.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! तुम हवि रूपी अन्न की कामना करते हो. मैं तुम्हारी बारबार स्तुति करता हूं. तुम मुझे वीरों से युक्त धन प्रदान करो. (३)

EN English Translation

O Indra! You wish for food in the form of havi. I praise you again and again. You give me wealth containing heroes. (3)

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