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अथर्ववेद

Kanda 20 • Sukta 110 • Mantra 1

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 20 • सूक्त 110 • मन्त्र 1

20.110.1

Mantra ID: 20.110.1

इन्द्रा॑य॒ मद्व॑ने सु॒तं परि॑ ष्टोभन्तु नो॒ गिरः॑ । अ॒र्कम॑र्चन्तु का॒रवः॑ ॥ (१)

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अथर्ववेद मन्त्र 20.110.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

सेवा के योग्य इस यज्ञ में हमारी वाणियां सोमरस से युक्त हो कर इंद्र की स्तुति करती हुई उन की पूजा करें. (१)

EN English Translation

In this yajna worthy of service, our vanis should be associated with Someras and worship Indra while praising him. (1)

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