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अथर्ववेद

Kanda 20 • Sukta 110 • Mantra 2

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 20 • सूक्त 110 • मन्त्र 2

20.110.2

Mantra ID: 20.110.2

यस्मि॒न्विश्वा॒ अधि॒ श्रियो॒ रण॑न्ति स॒प्त सं॒सदः॑ । इन्द्रं॑ सु॒ते ह॑वामहे ॥ (२)

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अथर्ववेद मन्त्र 20.110.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

विभूतिमयी सभी सभाएं जिन्हें प्राप्त होती हैं, उन इंद्र को उस समय बुलाते हैं, जब सोमरस तैयार हो जाता है. (२)

EN English Translation

All the meetings that are received by vibhutimayi call Indra when Someras is ready. (2)

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