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अथर्ववेद

Kanda 20 • Sukta 124 • Mantra 5

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 20 • सूक्त 124 • मन्त्र 5

20.124.5

Mantra ID: 20.124.5

आ॑दि॒त्यैरिन्द्रः॒ सग॑णो म॒रुद्भि॑र॒स्माकं॑ भूत्ववि॒ता त॒नूना॑म् । ह॒त्वाय॑ दे॒वा असु॑रा॒न्यदाय॑न्दे॒वा दे॑व॒त्वम॑भि॒रक्ष॑माणाः ॥ (५)

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अथर्ववेद मन्त्र 20.124.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

देवत्व की रक्षा के लिए जिन देवों ने राक्षसों को नष्ट किया, वे इंद्र आदित्यों और मरुतों सहित हमारे शरीरों की रक्षा करें. (५)

EN English Translation

The gods who destroyed the demons to protect divinity, may Indra protect our bodies, including the Adityas and maruts. (5)

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