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अथर्ववेद

Kanda 20 • Sukta 127 • Mantra 14

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 20 • सूक्त 127 • मन्त्र 14

20.127.14

Mantra ID: 20.127.14

उप॑ नो न रमसि॒ सूक्ते॑न॒ वच॑सा व॒यं भ॒द्रेण॒ वच॑सा व॒यम् । वना॑दधिध्व॒नो गि॒रो न रि॑ष्येम क॒दा च॒न ॥ (१४)

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अथर्ववेद मन्त्र 20.127.14 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! हम तुम्हें सूक्त के द्वारा प्रसन्न करते हैं. तुम हमारी वाणियां अंतरिक्ष में सुनो. हमारा कभी नाश न हो. (१४)

EN English Translation

Hey Indra! We please you through Sukta. You listen to our voices in space. May we never perish. (14)

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