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अथर्ववेद

Kanda 20 • Sukta 133 • Mantra 4

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 20 • सूक्त 133 • मन्त्र 4

20.133.4

Mantra ID: 20.133.4

उ॑त्ता॒नायै॑ शया॒नायै॒ तिष्ठ॑न्ती॒ वाव॑ गूहसि । न वै॑ कुमारि॒ तत्तथा॒ यथा॑ कुमारि॒ मन्य॑से ॥ (४)

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अथर्ववेद मन्त्र 20.133.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे कुमारी! तू सोने जाती है. तू उसे जैसा समझती है, वह वैसा नहीं है. (४)

EN English Translation

O virgin! You go to sleep. He is not what you think of him. (4)

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