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अथर्ववेद

Kanda 20 • Sukta 135 • Mantra 1

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 20 • सूक्त 135 • मन्त्र 1

20.135.1

Mantra ID: 20.135.1

भुगि॑त्य॒भिग॑तः॒ शलि॑त्य॒पक्रा॑न्तः॒ फलि॑त्य॒भिष्ठि॑तः । दु॒न्दुभि॑माहनना॒भ्यां जरितरोथा॑मो दै॒व ॥ (१)

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अथर्ववेद मन्त्र 20.135.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

खाने वाला चला गया, गतिशील जीव भाग गया है तथा उसका शरीर रखा है. हे स्तुति करने वालो! तुम इस के बाद दुंदुभि जिन दो डंडों से बजाई जाती है, उस से खेलो. (१)

EN English Translation

The eater is gone, the moving creature has fled and his body is kept. O praisers! After this, play with the two sticks with which Dundubi is played. (1)

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