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अथर्ववेद

Kanda 20 • Sukta 135 • Mantra 2

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 20 • सूक्त 135 • मन्त्र 2

20.135.2

Mantra ID: 20.135.2

को॑श॒बिले॑ रजनि॒ ग्रन्थे॑र्धा॒नमु॒पानहि॑ पा॒दम् । उत्त॑मां॒ जनि॑मां ज॒न्यानुत्त॑मां॒ जनी॒न्वर्त्म॑न्यात् ॥ (२)

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अथर्ववेद मन्त्र 20.135.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

पैर के जूते में, धान की कुटिया में तथा उत्तम धरती से उत्पन्न पदार्थो को मार्ग में रखो. (२)

EN English Translation

Put the materials produced in the shoes of the feet, in the paddy hut and from the best earth. (2)

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