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अथर्ववेद

Kanda 20 • Sukta 135 • Mantra 13

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 20 • सूक्त 135 • मन्त्र 13

20.135.13

Mantra ID: 20.135.13

अ॑रंग॒रो वा॑वदीति त्रे॒धा ब॒द्धो व॑र॒त्रया॑ । इरा॑मह॒ प्रशं॑स॒त्यनि॑रा॒मप॑ सेधति ॥ (१३)

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अथर्ववेद मन्त्र 20.135.13 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

चमड़े की रस्सी से बंधा हुआ रहट बारबार शब्द करता हुआ ऐसे स्थान को सींचता है, जहां फसले हैं. (१३)

EN English Translation

Tied with a leather rope, Rahat repeatedly waters a place where there are crops. (13)

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