Popular:
अथर्ववेद

Kanda 20 • Sukta 136 • Mantra 1

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 20 • सूक्त 136 • मन्त्र 1

20.136.1

Mantra ID: 20.136.1

यद॑स्या अंहु॒भेद्याः॑ कृ॒धु स्थू॒लमु॒पात॑सत् । मु॒ष्काविद॑स्या एज॒तो गो॑श॒फे श॑कु॒लावि॑व ॥ (१)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

अथर्ववेद मन्त्र 20.136.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

पाप का विनाश करने वाली ओषधि को क्रोध हो गया है. इस के सूखे हुए शकुल गाय के खुर के गड्ढे में भरे पानी में कांपते हैं. (१)

EN English Translation

The medicine that destroys sin has become angry. Its dried shakul trembles in the water filled in the pit of the cow's hoof. (1)

卐 HinduText AI