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अथर्ववेद

Kanda 20 • Sukta 142 • Mantra 6

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 20 • सूक्त 142 • मन्त्र 6

20.142.6

Mantra ID: 20.142.6

यन्नू॒नं धी॒भिर॑श्विना पि॒तुर्योना॑ नि॒षीद॑थः । यद्वा॑ सु॒म्नेभि॑रुक्थ्या ॥ (६)

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अथर्ववेद मन्त्र 20.142.6 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अश्चिनीकुमारो! तुम अपनी बुद्धि के द्वारा अपने पालनकर्ता के समीप विराजमान होते हो. तुम कल्याणकारी प्रशंसा के पात्र हो. (६)

EN English Translation

O Ashchini Kumaro! You sit near your Swami through your wisdom. You deserve welfare praise. (6)

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