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अथर्ववेद

Kanda 20 • Sukta 23 • Mantra 2

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 20 • सूक्त 23 • मन्त्र 2

20.23.2

Mantra ID: 20.23.2

स॒त्तो होता॑ न ऋ॒त्विय॑स्तिस्ति॒रे ब॒र्हिरा॑नु॒षक् । अयु॑ज्रन्प्रा॒तरद्र॑यः ॥ (२)

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अथर्ववेद मन्त्र 20.23.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! हमारे यज्ञ में होता नाम का ऋत्विज्‌ समय पर उपस्थित हो कर बैठे. हमारे यज्ञ में कुश एकदूसरे से मिले हुए बिछे. सोमरस कूटने के लिए प्रातः स्वप्न में पत्थर एकदूसरे से मिले. (२)

EN English Translation

O Indra! In our yajna, the name of The Ritvij sat on time. In our yajna, Kush met each other. In the morning, stones met each other in the morning to crush Someras. (2)

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