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अथर्ववेद

Kanda 20 • Sukta 26 • Mantra 2

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 20 • सूक्त 26 • मन्त्र 2

20.26.2

Mantra ID: 20.26.2

आ घा॑ गम॒द्यदि॒ श्रव॑त्सह॒स्रिणी॑भिरू॒तिभिः॑ । वाजे॑भि॒रुप॑ नो॒ हव॑म् ॥ (२)

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अथर्ववेद मन्त्र 20.26.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

इंद्र मेरी स्तुतियां और आह्वानों को सुन कर अपने रक्षा साधन और अन्न ले कर यहां आएं. (२)

EN English Translation

Indra, listening to my praises and calls, bring your protective equipment and food here. (2)

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