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अथर्ववेद

Kanda 20 • Sukta 27 • Mantra 2

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 20 • सूक्त 27 • मन्त्र 2

20.27.2

Mantra ID: 20.27.2

शिक्षे॑यमस्मै॒ दित्से॑यं॒ शची॑पते मनी॒षिणे॑ । यद॒हं गोप॑तिः॒ स्याम् ॥ (२)

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अथर्ववेद मन्त्र 20.27.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे शचीपति इंद्र! जब तुम्हारी कृपा से मैं गायों से संपन्न हो जाऊंगा, तब इस स्तुति करने वाले विद्वान्‌ को धन देने की इच्छा करता हुआ इसे धन दे सकूंगा. (२)

EN English Translation

This is Shakhipati Indra! When by your grace I am endowed with cows, I will be able to give money to this praising scholar, wishing to give him money. (2)

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