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अथर्ववेद

Kanda 20 • Sukta 34 • Mantra 15

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 20 • सूक्त 34 • मन्त्र 15

20.34.15

Mantra ID: 20.34.15

यः सु॒न्वन्त॒मव॑ति॒ यः पच॑न्तं॒ यः शंस॑न्तं॒ यः श॑शमा॒नमू॒ती । यस्य॒ ब्रह्म॒ वर्ध॑नं॒ यस्य॒ सोमो॒ यस्ये॒दं राधः॒ स ज॑नास॒ इन्द्रः॑ ॥ (१५)

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अथर्ववेद मन्त्र 20.34.15 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे मनुष्यो! जो सोमरस निचोड़ने वाले की, चमकाने वालों की तथा स्तुतियां करने वाले की रक्षा करते हैं, सोमरस जिसके बल, ज्ञान और यश को बढ़ाता है, वे ही इंद्र है. (१५)

EN English Translation

O men! The Someras who protects the squeezer, the one who shines and the one who praises, the one whose strength, knowledge and fame, whose strength, knowledge and fame, is Indra. (15)

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