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अथर्ववेद

Kanda 20 • Sukta 39 • Mantra 2

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 20 • सूक्त 39 • मन्त्र 2

20.39.2

Mantra ID: 20.39.2

व्यन्तरि॑क्षमतिर॒न्मदे॒ सोम॑स्य रोच॒ना । इन्द्रो॒ यदभि॑नद्व॒लम् ॥ (२)

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अथर्ववेद मन्त्र 20.39.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

इंद्र ने सोमरस पान कर के प्रसन्न होने पर वर्षा के जल की अंतरिक्ष अर्थात्‌ आकाश से वृष्टि की. उन्होंने अपनी शक्ति से मेघों को विदीर्ण किया. (२)

EN English Translation

When Indra was pleased to drink someras, he rained rain water from space i.e. the sky. (2)

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