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अथर्ववेद

Kanda 20 • Sukta 46 • Mantra 1

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 20 • सूक्त 46 • मन्त्र 1

20.46.1

Mantra ID: 20.46.1

प्र॑णे॒तारं॒ वस्यो॒ अच्छा॒ कर्ता॑रं॒ ज्योतिः॑ स॒मत्सु॑ । सा॑स॒ह्वांसं॑ यु॒धामित्रा॑न् ॥ (१)

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अथर्ववेद मन्त्र 20.46.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

वे इंद्र नेता, युद्ध क्षेत्र में शत्रुओं को वश में करने वाले और यज्ञो में प्रकाश करने वाले हैं. (१)

EN English Translation

He is the leader of Indra, the one who subdues the enemies in the war zone and the one who illuminates the yagnas. (1)

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