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अथर्ववेद

Kanda 20 • Sukta 47 • Mantra 19

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 20 • सूक्त 47 • मन्त्र 19

20.47.19

Mantra ID: 20.47.19

वि द्या॑मेषि॒ रज॑स्पृ॒थ्वह॒र्मिमा॑नो अ॒क्तुभिः॑ । पश्यं॒ जन्मा॑नि सूर्य ॥ (१९)

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अथर्ववेद मन्त्र 20.47.19 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! तुम सब पर कृपा करते हो तथा उन्हें देखते हुए रात्रि और दिन का निर्माण करते हो. तुम तीनों लोकों में विचरण करते हो. (१९)

EN English Translation

O Indra! You are kind to all and see them and create night and day. You roam in all three worlds. (19)

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