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अथर्ववेद

Kanda 20 • Sukta 57 • Mantra 1

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 20 • सूक्त 57 • मन्त्र 1

20.57.1

Mantra ID: 20.57.1

सु॑रूपकृ॒त्नुमू॒तये॑ सु॒दुघा॑मिव गो॒दुहे॑ । जु॑हू॒मसि॒ द्यवि॑द्यवि ॥ (१)

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अथर्ववेद मन्त्र 20.57.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

जिस प्रकार गाय को दुहने के लिए गोदोहक को बुलाया जाता है, उसी प्रकार प्रत्येक अवसर पर अपनी रक्षा के लिए हम इंद्र का आह्वान करते हैं. (१)

EN English Translation

Just as Godohak is called to milk a cow, so on every occasion we invoke Indra to protect ourselves. (1)

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