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अथर्ववेद

Kanda 20 • Sukta 60 • Mantra 5

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 20 • सूक्त 60 • मन्त्र 5

20.60.5

Mantra ID: 20.60.5

ए॒वा हि ते॒ विभू॑तय ऊ॒तय॑ इन्द्र॒ माव॑ते । स॒द्यश्चि॒त्सन्ति॑ दा॒शुषे॑ ॥ (५)

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अथर्ववेद मन्त्र 20.60.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! जो यजमान तुम्हें हवि प्रदान करता है, उस के लिए तुम्हारे रक्षा के साधन शीघ्र प्राप्त हो जाते हैं. (५)

EN English Translation

O Indra! For the host who gives you courage, your means of protection are quickly obtained. (5)

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