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अथर्ववेद

Kanda 20 • Sukta 63 • Mantra 6

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 20 • सूक्त 63 • मन्त्र 6

20.63.6

Mantra ID: 20.63.6

यश्चि॒द्धि त्वा॑ ब॒हुभ्य॒ आ सु॒तावाँ॑ आ॒विवा॑सति । उ॒ग्रं तत्प॑त्यते॒ शव॒ इन्द्रो॑ अ॒ङ्ग ॥ (६)

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अथर्ववेद मन्त्र 20.63.6 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! जो पुरुष सोमरस ले कर अनेक स्तोत्रं द्वारा तुम्हारी प्रार्थना करता है, वह प्रचंड बल और ऐश्वर्य प्राप्त करता है. (६)

EN English Translation

O Indra! The man who prays to you with somaras and many stotras attains tremendous strength and opulence. (6)

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