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अथर्ववेद

Kanda 20 • Sukta 63 • Mantra 9

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 20 • सूक्त 63 • मन्त्र 9

20.63.9

Mantra ID: 20.63.9

येन॒ सिन्धुं॑ म॒हीर॒पो रथाँ॑ इव प्रचो॒दयः॑ । पन्था॑मृ॒तस्य॒ यात॑वे॒ तमी॑महे ॥ (९)

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अथर्ववेद मन्त्र 20.63.9 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! जिस बल से तुम ने जलों को सागर की ओर गमनशील बनाया. हम अमृत के मार्ग में आगे बढ़ने के लिए उसी बल की याचना करते हैं. (९)

EN English Translation

O Indra! The force with which you made the waters moving towards the ocean. We plead with the same force to move forward in the path of nectar. (9)

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