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अथर्ववेद

Kanda 20 • Sukta 64 • Mantra 4

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 20 • सूक्त 64 • मन्त्र 4

20.64.4

Mantra ID: 20.64.4

एदु॒ मध्वो॑ म॒दिन्त॑रं सि॒ञ्च वा॑ध्वर्यो॒ अन्ध॑सः । ए॒वा हि वी॒र स्तव॑ते स॒दावृ॑धः ॥ (४)

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अथर्ववेद मन्त्र 20.64.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अध्वर्युजनो! शहद से भी अधिक मीठे अन्न से इंद्र को तृप्त करो. ये इंद्र सदा यजमान की वृद्धि करते हुए स्तुतियां स्वीकार करते हैं. (४)

EN English Translation

O Adhwaryujano! Satisfy Indra with sweeter food than honey. This Indra always accepts praises while increasing the host. (4)

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