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अथर्ववेद

Kanda 20 • Sukta 64 • Mantra 6

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 20 • सूक्त 64 • मन्त्र 6

20.64.6

Mantra ID: 20.64.6

तं वो॒ वाजा॑नां॒ पति॒महू॑महि श्रव॒स्यवः॑ । अप्रा॑युभिर्य॒ज्ञेभि॑र्वावृ॒धेन्य॑म् ॥ (६)

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अथर्ववेद मन्त्र 20.64.6 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

अन्न की कामना वाले हम अन्न के स्वामी इंद्र को अपने यज्ञ में बुलाते हैं. जिन यज्ञों का अनुष्ठान विधिपूर्वक किया जाता है. उन से इंद्र की सदा वृद्धि होती है. (६)

EN English Translation

With the desire for food, we call Indra, the swami of food, in our yagna. The yajnas whose rituals are performed methodically. Indra always grows from them. (6)

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