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अथर्ववेद

Kanda 20 • Sukta 68 • Mantra 5

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 20 • सूक्त 68 • मन्त्र 5

20.68.5

Mantra ID: 20.68.5

उ॒त ब्रु॑वन्तु नो॒ निदो॒ निर॒न्यत॑श्चिदारत । दधा॑ना॒ इन्द्र॒ इद्दुवः॑ ॥ (५)

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अथर्ववेद मन्त्र 20.68.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे स्तोताओ! तुम इंद्र का आश्रय ग्रहण करो. इस से निंदा करने वाले हमारी निंदा नहीं कर सकेंगे. (५)

EN English Translation

O Stotao! You take refuge in Indra. With this, those who condemn us will not be able to condemn us. (5)

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