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अथर्ववेद

Kanda 20 • Sukta 69 • Mantra 7

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 20 • सूक्त 69 • मन्त्र 7

20.69.7

Mantra ID: 20.69.7

अक्षि॑तोतिः सनेदि॒मं वाज॒मिन्द्रः॑ सह॒स्रिण॑म् । यस्मि॒न्विश्वा॑नि॒ पौंस्या॑ ॥ (७)

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अथर्ववेद मन्त्र 20.69.7 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

यज्ञ कर्म की रक्षा करने वाले इंद्र में सैकड़ों पराक्रम व्याप्त हैं. हमें उन्हीं की सेवा करनी चाहिए. (७)

EN English Translation

There are hundreds of might in Indra, who protects yajna karma. We should serve them. (7)

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