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अथर्ववेद

Kanda 20 • Sukta 70 • Mantra 5

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 20 • सूक्त 70 • मन्त्र 5

20.70.5

Mantra ID: 20.70.5

अतः॑ परिज्म॒न्ना ग॑हि दि॒वो वा॑ रोच॒नादधि॑ । सम॑स्मिन्नृञ्जते॒ गिरः॑ ॥ (५)

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अथर्ववेद मन्त्र 20.70.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! तुम ज्योतिर्मान स्वर्ग से हमारे यज्ञ में आओ. हमारी स्तुतियां इंद्र के साथ ही संयोग करती हैं. (५)

EN English Translation

O Indra! Come to our sacrifice from heaven. Our praises coincide with Indra. (5)

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