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अथर्ववेद

Kanda 20 • Sukta 74 • Mantra 4

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 20 • सूक्त 74 • मन्त्र 4

20.74.4

Mantra ID: 20.74.4

स॒सन्तु॒ त्या अरा॑तयो॒ बोध॑न्तु शूर रा॒तयः॑ । आ तू न॑ इन्द्र शंसय॒ गोष्वश्वे॑षु शु॒भ्रिषु॑ स॒हस्रे॑षु तुवीमघ ॥ (४)

ॐ

शास्त्र जिज्ञासा: इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

अथर्ववेद मन्त्र 20.74.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

॥ वैदिक संदर्भ ॥

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अधिक धन के स्वामी इंद्र! तुम हमारी हजारों गायों, घोड़ों आदि को धन से भरो. हम जागृत रहें और हमारे शन्रु निद्रा के वश में हो जाएं. (४)

EN English Translation

O Swami of more wealth Indra! You fill thousands of our cows, horses etc. with wealth. Let us stay awake and be under the control of our peaceful sleep. (4)

शास्त्र जिज्ञासा
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