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अथर्ववेद

Kanda 20 • Sukta 74 • Mantra 5

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 20 • सूक्त 74 • मन्त्र 5

20.74.5

Mantra ID: 20.74.5

समि॑न्द्र गर्द॒भं मृ॑ण नु॒वन्तं॑ पा॒पया॑मु॒या । आ तू न॑ इन्द्र शंसय॒ गोष्वश्वे॑षु शु॒भ्रिषु॑ स॒हस्रे॑षु तुवीमघ ॥ (५)

ॐ

शास्त्र जिज्ञासा: इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

अथर्ववेद मन्त्र 20.74.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

॥ वैदिक संदर्भ ॥

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! तुम पाप वृत्ति वाले राक्षसों का वध कर दो. तुम हमारी गायों आदि को दूसरों का नाश करने की शक्ति प्रदान करो. (५)

EN English Translation

O Indra! You kill the demons with sinful instincts. You give our cows etc. the power to destroy others. (5)

शास्त्र जिज्ञासा
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