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अथर्ववेद

Kanda 20 • Sukta 76 • Mantra 3

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 20 • सूक्त 76 • मन्त्र 3

20.76.3

Mantra ID: 20.76.3

कस्ते॒ मद॑ इन्द्र॒ रन्त्यो॑ भू॒द्दुरो॒ गिरो॑ अ॒भ्युग्रो वि धा॑व । कद्वाहो॑ अ॒र्वागुप॑ मा मनी॒षा आ त्वा॑ शक्यामुप॒मम्राधो॒ अन्नैः॑ ॥ (३)

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अथर्ववेद मन्त्र 20.76.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! हमें वह स्तोम अर्थात्‌ मंत्र समूह कौन देगा जो तुम्हें प्रसन्न कर सके? कौन सा अश्व तुम्हें मेरे पास लाएगा? तुम मेरा स्तोम सुनने के लिए आओ. तुम उपमेय हो, मैं तुम्हें हवियों द्वारा प्रसन्न करने में सफलता प्राप्त करूंगा. (३)

EN English Translation

O Indra! Who will give us the stome that can please you? Which horse will bring you to me? You come to hear my stom. You are theorem, I will succeed in pleasing you with the divines. (3)

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