Popular:
अथर्ववेद

Kanda 20 • Sukta 76 • Mantra 4

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 20 • सूक्त 76 • मन्त्र 4

20.76.4

Mantra ID: 20.76.4

कदु॑ द्यु॒म्नमि॑न्द्र॒ त्वाव॑तो॒ नॄन्कया॑ धि॒या क॑रसे॒ कन्न॒ आग॑न् । मि॒त्रो न स॒त्य उ॑रुगाय भृ॒त्या अन्ने॑ समस्य॒ यदस॑न्मनी॒षाः ॥ (४)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

अथर्ववेद मन्त्र 20.76.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! तुम किस बुद्धि से अपने आश्रितों को यशस्वी बनाते हो? तुम महान कीर्ति वाले हो, इसलिए सच्चे साथ कै समय इस यज्ञ को अन्न की वृद्धि से संपन्न करो. (४)

EN English Translation

O Indra! With what wisdom do you make your dependents successful? You are of great fame, so at the time of true time, complete this yajna with the increase of food. (4)

卐 HinduText AI