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अथर्ववेद

Kanda 20 • Sukta 87 • Mantra 1

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 20 • सूक्त 87 • मन्त्र 1

20.87.1

Mantra ID: 20.87.1

अध्व॑र्यवोऽरु॒णं दु॒ग्धमं॒शुं जु॒होत॑न वृष॒भाय॑ क्षिती॒नाम् । गौ॒राद्वेदी॑याँ अव॒पान॒मिन्द्रो॑ वि॒श्वाहेद्या॑ति सु॒तसो॑ममि॒च्छन् ॥ (१)

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अथर्ववेद मन्त्र 20.87.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अध्वर्युजनो! इंद्र पृथ्वी पर वर्षा करने वाले हैं. उन इंद्र के लिए सोमरस के दूध रूप अंश की आहुति दो. ये इंद्र सोमरस की कामना करते हुए यज्ञ में आते हैं. (१)

EN English Translation

O Swami! Indra is going to rain on earth. Offer a portion of the milk form of Somras to Indra. They come to the yajna wishing indra someras. (1)

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