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अथर्ववेद

Kanda 20 • Sukta 91 • Mantra 9

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 20 • सूक्त 91 • मन्त्र 9

20.91.9

Mantra ID: 20.91.9

तं व॒र्धय॑न्तो म॒तिभिः॑ शि॒वाभिः॑ सिं॒हमि॑व॒ नान॑दतं स॒धस्थे॑ । बृह॒स्पतिं॒ वृष॑णं॒ शूर॑सातौ॒ भरे॑भरे॒ अनु॑ मदेम जि॒ष्णुम् ॥ (९)

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अथर्ववेद मन्त्र 20.91.9 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

उस युद्ध में सिंह के समान गर्जन करने वाले बृहस्पति को हम अपनी उत्तम बुद्धियों से बढ़ाते हैं. (९)

EN English Translation

In that war, we increase Jupiter, who roars like a lion, with our best intellects. (9)

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