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अथर्ववेद

Kanda 20 • Sukta 92 • Mantra 1

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 20 • सूक्त 92 • मन्त्र 1

20.92.1

Mantra ID: 20.92.1

अ॒भि प्र गोप॑तिं गि॒रेन्द्र॑मर्च॒ यथा॑ वि॒दे । सू॒नुं स॒त्यस्य॒ सत्प॑तिम् ॥ (१)

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अथर्ववेद मन्त्र 20.92.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे स्तोता! मैं गायों के स्वामी इंद्र को जिस प्रकार प्राप्त कर सळूं, तुम उसी प्रकार उन का पूजन करो. (१)

EN English Translation

This hymn! The way I receive Indra, the swami of cows, you worship him in the same way. (1)

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