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अथर्ववेद

Kanda 20 • Sukta 92 • Mantra 21

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 20 • सूक्त 92 • मन्त्र 21

20.92.21

Mantra ID: 20.92.21

आ प॑प्राथ महि॒ना वृष्ण्या॑ वृष॒न्विश्वा॑ शविष्ठ॒ शव॑सा । अ॒स्माँ अ॑व मघव॒न्गोम॑ति व्र॒जे वज्रि॑ञ्चि॒त्राभि॑रू॒तिभिः॑ ॥ (२१)

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अथर्ववेद मन्त्र 20.92.21 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! हमारी गोचर भूमि में अपने रक्षा साधनों से हमें रक्षित करते हुए हमारी वृद्धि करो. (२१)

EN English Translation

O Indra! Increase us by protecting us with your defense means in our transiting land. (21)

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