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अथर्ववेद

Kanda 20 • Sukta 92 • Mantra 5

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 20 • सूक्त 92 • मन्त्र 5

20.92.5

Mantra ID: 20.92.5

अर्च॑त॒ प्रार्च॑त॒ प्रिय॑मेधासो॒ अर्च॑त । अर्च॑न्तु पुत्र॒का उ॒त पुरं॒ न धृ॒ष्ण्वर्चत ॥ (५)

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अथर्ववेद मन्त्र 20.92.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे स्तोताओ! तुम इंद्र का पूजन श्रेष्ठ रीति से करो. अपने शत्रुओं का नाश करने के लिए तुम इंद्र का पूजन करो. (५)

EN English Translation

O Stotao! You should worship Indra in the best way. Worship Indra to destroy your enemies. (5)

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