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अथर्ववेद

Kanda 20 • Sukta 96 • Mantra 23

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 20 • सूक्त 96 • मन्त्र 23

20.96.23

Mantra ID: 20.96.23

अङ्गेअ॑ङ्गे॒ लोम्नि॑लोम्नि॒ यस्ते॒ पर्व॑णिपर्वणि । यक्षं॑ त्वच॒स्यं ते व॒यं क॒श्यप॑स्य वीब॒र्हेण॒ विष्व॑ञ्चं॒ वि वृ॑हामसि ॥ (२३)

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अथर्ववेद मन्त्र 20.96.23 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे रोगी! तेरे सब अंगों, सभी रोम कूपों तथा जोड़ों में व्याप्त यक्ष्मा रोग को हम दूर करते हैं. तेरी त्वचा में स्थित तथा नेत्रं में व्याप्त यक्ष्मा रोग को भी मैं मंत्रं द्वारा नष्ट करता हूं. (२३)

EN English Translation

O patient! We remove tuberculosis in all your organs, all follicles and joints. I also destroy the tuberculosis disease located in your skin and in the eyes with mantras. (23)

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