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अथर्ववेद

Kanda 3 • Sukta 23 • Mantra 6

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 3 • सूक्त 23 • मन्त्र 6

3.23.6

Mantra ID: 3.23.6

यासां॒ द्यौष्पि॒ता पृ॑थि॒वी मा॒ता स॑मु॒द्रो मूलं॑ वी॒रुधां॑ ब॒भूव॑ । तास्त्वा॑ पुत्र॒विद्या॑य॒ दैवीः॒ प्राव॒न्त्वोष॑धयः ॥ (६)

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अथर्ववेद मन्त्र 3.23.6 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

जिन वृक्षों का पिता आकाश और माता पृथ्वी है, जलराशि उन की वृद्धि का मूल कारण है. वृक्षों के रूप में वे दिव्य जड़ीबूटियां पुत्र लाभ के लिए तेरी रक्षा करें. (६)

EN English Translation

Water is the root cause of the growth of trees whose father is the sky and mother is the earth. Protect you as trees as they divine herbs for the benefit of the Son. (6)

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