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अथर्ववेद

Kanda 3 • Sukta 8 • Mantra 5

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 3 • सूक्त 8 • मन्त्र 5

3.8.5

Mantra ID: 3.8.5

सं वो॒ मनां॑सि॒ सं व्र॒ता समाकू॑तीर्नमामसि । अ॒मी ये विव्र॑ता॒ स्थन॒ तान्वः॒ सं न॑मयामसि ॥ (५)

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अथर्ववेद मन्त्र 3.8.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे हमारे विरोधी जनो! हम तुम्हारे चित्तों, कर्मों और संकल्पों को अपने अनुकूल बनाते हैं. इन में जो नियमों के विरुद्ध काम करने वाले हों, उन्हें हम तुम्हारे सामने ही दंड दें. (५)

EN English Translation

O our opponents! We adapt your minds, deeds and resolutions to us. Those who are against the rules, we should punish them in front of you. (5)

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