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अथर्ववेद

Kanda 4 • Sukta 10 • Mantra 2

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 4 • सूक्त 10 • मन्त्र 2

4.10.2

Mantra ID: 4.10.2

यो अ॑ग्र॒तो रो॑च॒नानां॑ समु॒द्रादधि॑ जज्ञि॒षे । श॒ङ्खेन॑ ह॒त्वा रक्षां॑स्य॒त्त्रिणो॒ वि ष॑हामहे ॥ (२)

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अथर्ववेद मन्त्र 4.10.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे शंख! तू प्रकाशित होने वाले नक्षत्रों के आगे वर्तमान होता है तथा सागर के ऊपर वाले भाग पर जन्म लेता है. हम तेरे द्वारा राक्षसों और पिशाचों को पराजित करते हैं. (२)

EN English Translation

O conch! You are present in front of the constellations that are illuminated and are born on the upper part of the ocean. We defeat demons and vampires through you. (2)

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