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अथर्ववेद

Kanda 4 • Sukta 13 • Mantra 6

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 4 • सूक्त 13 • मन्त्र 6

4.13.6

Mantra ID: 4.13.6

अ॒यं मे॒ हस्तो॒ भग॑वान॒यं मे॒ भग॑वत्तरः । अ॒यं मे॑ वि॒श्वभे॑षजो॒ऽयं शि॒वाभि॑मर्शनः ॥ (६)

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अथर्ववेद मन्त्र 4.13.6 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

मुझ ऋषि का यह हाथ भाग्य वाला एवं भाग्यवालियों से भी अधिक उत्तम है. मेरा यह हाथ सभी रोगों को दूर करने वाली ओषधि है. इस का स्पर्श सुख देने वाला हो. (६)

EN English Translation

This hand of my sage is lucky and better than the lucky ones. This hand of mine is a medicine to remove all diseases. The touch of this is pleasant. (6)

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