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अथर्ववेद

Kanda 4 • Sukta 24 • Mantra 5

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 4 • सूक्त 24 • मन्त्र 5

4.24.5

Mantra ID: 4.24.5

यस्य॒ जुष्टिं॑ सो॒मिनः॑ का॒मय॑न्ते॒ यं हव॑न्त॒ इषु॑मन्तं॒ गवि॑ष्टौ । यस्मि॑न्न॒र्कः शि॑श्रि॒ये यस्मि॒न्नोजः॒ स नो॑ मुञ्च॒त्वंह॑सः ॥ (५)

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अथर्ववेद मन्त्र 4.24.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

सोमरस वाले यजमान जिन की प्रीति की कामना करते हैं तथा जिन आयुध धारी इंद्र को पणियों द्वारा चुराई गई गायों की खोज के लिए बुलाया जाता है तथा जिन इंद्र के विषय में अर्चना के साधन मंत्र आश्रित हैं, वह इंद्र हमें पाप से बचाएं. (५)

EN English Translation

May indra, the one who is loved by the somers, who is called to search for the cows stolen by the panis and the one about whom the means of worship depend on mantras, save us from sin. (5)

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