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अथर्ववेद

Kanda 4 • Sukta 3 • Mantra 5

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 4 • सूक्त 3 • मन्त्र 5

4.3.5

Mantra ID: 4.3.5

यो अ॒द्य स्ते॒न आय॑ति॒ स संपि॑ष्टो॒ अपा॑यति । प॒थाम॑पध्वं॒सेनै॒त्विन्द्रो॒ वज्रे॑ण हन्तु॒ तम् ॥ (५)

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अथर्ववेद मन्त्र 4.3.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

आज जो चोर आता है, वह हमारे द्वारा कुटपिट कर दूर भागे. वह मार्गो में से कष्टदायक मार्ग से जाए और इंद्र अपने वज्र से उस की हिंसा करें. (५)

EN English Translation

The thief who comes today, he ran away from us. He should go through the painful path through the path and Indra should violence him with his thunderbolt. (5)

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