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अथर्ववेद

Kanda 4 • Sukta 35 • Mantra 7

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 4 • सूक्त 35 • मन्त्र 7

4.35.7

Mantra ID: 4.35.7

अव॑ बाधे द्वि॒षन्तं॑ देवपी॒युं स॒पत्ना॒ ये मेऽप॑ ते भवन्तु । ब्र॑ह्मौद॒नं वि॑श्व॒जितं॑ पचामि शृ॒ण्वन्तु॑ मे श्र॒द्दधा॑नस्य दे॒वाः ॥ (७)

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अथर्ववेद मन्त्र 4.35.7 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

मैं हिंसा करने वाले शत्रु का वध करता हूं तथा देवों के हिंसकों की हत्या करता हूं. जो मेरे शत्रु हैं, वे भाग जाएं. इस के निमित्त मैं सब को जीतने वाले ब्रह्मौदन को पकाता हूं. मुझ श्रद्धालु के वचनों को देव सुनें और मेरी सहायता करें. (७)

EN English Translation

I kill the enemy who commits violence and kill the violent ones of the gods. Those who are my enemies should run away. For this reason, I cook the Brahmaudan that conquers everyone. God listen to the words of my devotee and help me. (7)

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