Popular:
अथर्ववेद

Kanda 4 • Sukta 37 • Mantra 12

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 4 • सूक्त 37 • मन्त्र 12

4.37.12

Mantra ID: 4.37.12

जा॒या इद्वो॑ अप्स॒रसो॒ गन्ध॑र्वाः॒ पत॑यो यू॒यम् । अप॑ धावतामर्त्या॒ मर्त्या॒न्मा स॑चध्वम् ॥ (१२)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

अथर्ववेद मन्त्र 4.37.12 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे गंधर्वो! ये अप्सराएं तुम्हारी पत्नियां हैं और तुम इन के पति हो. तुम गंधर्व जाति के हो, इसलिए मनुष्यों से दूर भाग जाओ, इन से मत मिलो. (१२)

EN English Translation

O Gandharvo! These nymphs are your wives and you are their husbands. You belong to the Gandharva jati, so run away from humans, do not meet them. (12)

卐 HinduText AI