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अथर्ववेद

Kanda 5 • Sukta 12 • Mantra 3

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 5 • सूक्त 12 • मन्त्र 3

5.12.3

Mantra ID: 5.12.3

आ॒जुह्वा॑न॒ ईड्यो॒ वन्द्य॒श्चा या॑ह्यग्ने॒ वसु॑भिः स॒जोषाः॑ । त्वं दे॒वाना॑मसि यह्व॒ होता॒ स ए॑नान्यक्षीषि॒तो यजी॑यान् ॥ (३)

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अथर्ववेद मन्त्र 5.12.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अग्नि! तुम पूज्य व वंदना करने योग्य हो. तुम में भलीभांति हवन किया जाता है. हमारे इस यज्ञ कर्म में तुम वसुओं के सहित आओ. तुम देवों के होता हो. तुम हमारी प्रेरणा से देवों की पूजा करो. (३)

EN English Translation

O agni! You are worthy of worship and worship. Havan is performed well in you. In this yajna karma of ours, you come with the Vasus. You belong to gods. You worship the gods with our inspiration. (3)

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