Popular:
अथर्ववेद

Kanda 5 • Sukta 19 • Mantra 1

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 5 • सूक्त 19 • मन्त्र 1

5.19.1

Mantra ID: 5.19.1

अ॑तिमा॒त्रम॑वर्धन्त॒ नोदि॑व॒ दिव॑मस्पृशन् । भृगुं॑ हिंसि॒त्वा सृञ्ज॑या वैतह॒व्याः परा॑भवन् ॥ (१)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

अथर्ववेद मन्त्र 5.19.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

सृंजय के पुत्र एवं वीतहव्य के वंशजों की बहुत वृद्धि हुई. उन्होंने भृगुवंशी ब्राह्मणों की हत्या कर दी, इसलिए उन की पराजय हुई तथा वे स्वर्ग को नहीं पा सके. (१)

EN English Translation

The sons of Srinjaya and the descendants of Veethavya grew greatly. They killed the Bhriguvanshi Brahmins, so they were defeated and could not find heaven. (1)

卐 HinduText AI